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Saturday, January 2, 2016

शनिवार के टोटके


शनिवार के ये टोटके चमका देंगे आपकी किस्मत

हिंदू धर्म में शनिवार को सूर्यपुत्र शनिदेव की पूजा की जाती है। शास्त्रों में शनिदेव को भाग्य संवारने वाला माना गया है। शनि की शांति के ऎसे कई उपाय हैं जिनके द्वारा मनुष्य के सारे कष्ट दूर होते हैं। आइए ऐसे उपायों के बारे में जानते हैं जिन्हें करने से आपके सारे कष्ट दूर होकर शुभ फलों की प्राप्ति होगी।
 कुंडली के बुरे ग्रहों को पलट देते हैं ये आसान उपाय
1. शनिवार को तेल से बने पदार्थ भिखारी को खिलाने से शनि देव प्रसन्न होते हैं।
2. संध्या के समय जातक अपने घर में गूगल का धूप जलाएं।
3. भिखारियों को काले उड़द का दान करें।
4. जल में काले उड़द को प्रवाहित करें।
5. शनिवार की रात में रक्त चन्दन से अनार की कलम से ऊं ह्वीं को भोजपत्र पर लिख कर नित्य पूजा करने से अपार विद्या, बुद्धि की प्राप्ति होती है।
6. शनिवार को काले कुत्ते, काली गाय को रोटी और काली चिडिया को दाने डालने से जीवन की रूकावटें दूर होती हैं।
7. शनिवार को सुंदरकांड का पाठ सर्वश्रेष्ठ फल प्रदान करता है।
8. चींटियों को गोरज मुहूर्त में तिल चौली डालें।
9. शनिवार के दिन उड़द, तिल, तेल, गुड़ का लड्डू बना लें और जहां हल न चला हो वहां गाड़ दें।
शनिवार को शुभ योग में चमकाएं अपना भाग्य
किसी शनिवार को किसी भी शुभ योग/शुभ चौघडिया में शाम के समय अपनी लंबाई के बराबर लाल रेशमी सूत नाप लें। फिर एक पत्ता बरगद का तोड़ें। उसे स्वच्छ जल से धोकर पोंछ लें। तब पत्ते पर अपनी कामना रूपी नापा हुआ लाल रेशमी सूत लपेट दें और पत्ते को बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें। इस प्रयोग से सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं, कामनाओं की पूर्ति होती है। इससे तुरंत ही आपका भाग्य चमकने लगेगा।
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शनि साढ़ेसाती के उपाय



शनि साढ़ेसाती के उपाय
हर शनिवार शनि मंत्र का जप करें.

ॐ शं शनैश्चराय नम:

इस मंत्र का जप कम से कम 108 बार करना चाहिए।

हर शनिवार को तेल का दान करें। तेल का दान करने के लिए एक कटोरी में तेल लें और उस तेल में अपना मुंह देखकर उसका दान करें।
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Saturday, December 19, 2015

शनि देवजी की आरती



शनि देवजी की आरती 

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।
सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥ जय.॥

श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी।
नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥ जय.॥

क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥ जय.॥

मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥ जय.॥

देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी ॥जय.॥
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