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Sunday, December 20, 2015

श्री राम स्तुति (Shri Ram Stuti)


श्री राम स्तुति 
(Shri Ram Stuti)

नमामि भक्त-वत्सलं, कृपालु-शील-कोमलम्। 
भजामि ते पदाम्बुजं, अकामिनां स्व-धामदम्।।1।। 
निकाम-श्याम-सुन्दरं, भवाम्बु-नाथ मन्दरम्। 
प्रफुल्ल-कंज-लोचनं, मदादि-दोष-मोचनम्।।2।। 
प्रलम्ब-बाहु-विक्रमं, प्रभो·प्रमेय-वैभवम्। 
निषंग-चाप-सायकं, धरं त्रिलोक-नायकम्।।3।। 
दिनेश-वंश-मण्डनम्, महेश-चाप-खण्डनम्। 
मुनीन्द्र-सन्त-रंजनम्, सुरारि-वृन्द-भंजनम्।।4।। 
मनोज-वैरि-वन्दितं, अजादि-देव-सेवितम्। 
विशुद्ध-बोध-विग्रहं, समस्त-दूषणापहम्।।5।। 
नमामि इन्दिरा-पतिं, सुखाकरं सतां गतिम्। 
भजे स-शक्ति सानुजं, शची-पति-प्रियानुजम्।।6।। 
त्वदंघ्रि-मूलं ये नरा:, भजन्ति हीन-मत्सरा:। 
पतन्ति नो भवार्णवे, वितर्क-वीचि-संकुले।।7।। 
विविक्त-वासिन: सदा, भजन्ति मुक्तये मुदा। 
निरस्य इन्द्रियादिकं, प्रयान्ति ते गतिं स्वकम्।।8।। 
तमेकमद्भुतं प्रभुं, निरीहमीश्वरं विभुम्। 
जगद्-गुरूं च शाश्वतं, तुरीयमेव केवलम्।।9।। 
भजामि भाव-वल्लभं, कु-योगिनां सु-दुलर्भम्। 
स्वभक्त-कल्प-पादपं, समं सु-सेव्यमन्हवम्।।10।। 
अनूप-रूप-भूपतिं, नतोऽहमुर्विजा-पतिम्। 
प्रसीद मे नमामि ते, पदाब्ज-भक्तिं देहि मे।।11।। 
पठन्ति से स्तवं इदं, नराऽऽदरेण ते पदम्। 
व्रजन्ति नात्र संशयं, त्वदीय-भक्ति-संयुता:।।12।।
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