Shirdi Sai
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Friday, June 25, 2010
श्री साईं सच्चरित्र संदेश
"जहाँ अनन्य भाव से गुरु की सेवा होगी, वहां सांसारिक जीवन के दुःख और कष्टों का बिनाश हो जाएगा I फिर न्याय अथवा मीमांसा या दर्शनशास्त्र आदि और अन्य बोद्धिक प्रयतन की भी कोई आवश्यकता नहीं होती"
श्री साई सच्चरित्र
श्री साई सच्चरित्र
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श्री साई सच्चरित्र अध्याय 1
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