Thursday, May 13, 2010

श्री साईं सच्चरित्र संदेश

यह पूर्व जन्मो मे एकत्रित शुभ कर्मो का ही फल है की हमे श्री साईं चरणों में आने का सोभाग्य प्राप्त हुआ हैं, जिससे हमारा चित्त शान्त हुआ हैं और हम सांसारिक चिन्ताओ और प्रपंचो से मुक्त हुए हैं I
(CI 26 Adhaya 07 Sai Sachitra Dr R.N.Kakria)

Wednesday, May 12, 2010

श्री साईं सच्चरित्र संदेश

बाबा स्वयं में आनंद-मग्न व तल्लीन थे I वे यथार्थ में अखण्ड सच्चिदानंद थे I मै उनकी महानता और अद्वितीयता का वर्णन कैसे कर सकता हूँ ? जो भी साईं के चरण कमलो की शरण लेगा, उसका विशवास उनमे द्रढ़ हो जायेगा और उसे आत्म साक्षात्कार की प्राप्ति होगी I
(CI 28 Adhaya 07 Sai Sachitra Dr R.N.Kakria)

श्री साईं सच्चरित्र संदेश

"गत जन्मो के शुभ संस्कारो के परिणाम स्वरूप ही हमारी भेंट ऐसे संत से हुई है, जो ईशवर के अवतार हैं,उन्हें द्रढ़ता से अपने ह्रदय मे बसा लो, ताकि मरते दम तक हम उन्हें खो न सकें"
(CI 25 Adhaya 07 Sai Sachitra Dr R.N.Kakria )

Tuesday, May 11, 2010

श्री साईं सच्चरित्र संदेश

यह मेरा वेशिष्ट्ये है की जो भक्त मेरी शरण आकर एकचित्त होकर मेरी पूजा करते है और मन मे श्रद्धा भाव से मेरी सेवा करते है, में सदेव उनकी रक्षा करता हूँ और उनके कल्याणार्थ में सदेव चिंतित रहता हूँ I

(CI 34 Adhaya 06 Sai Sachitra Dr R.N.Kakria )

Monday, May 10, 2010

वैद, शास्त्रों, श्रुतियो, और स्मृतियों के पठन पाठन से सत्य और असत्य मे भेदभाव की विवेकशक्ति जाग्रत होगी और अनुभव होगा की गुरु के शब्द ही वेदांत हैं I ऐसा होने पर परमानन्द की प्राप्ति स्वत: ही हो जाएगी I

(CI 32 Adhaya 06 Sai Sachitra Dr R.N.Kakria )

Tuesday, May 4, 2010

मोक्ष

मन को अपना गुलाम बनाकर उससे मोक्ष का काम लेना चाहिए। मन को कामना,विषय, इच्छा और तृष्णा आदि से खाली करके उसमें ईश्वरीय प्रेम भरना चाहिए। सदैव चौकस होकर मन पर निगरानी रखनी चाहिए तथा आत्मसुख को पाकर उसी में मस्त रहना चाहिए। मन कोई वस्तु नहीं है। मन तुम्हारी ही शक्ति से कार्य करता है। तुम मन से भिन्न ज्योतिस्वरूप आत्मा हो।
Hariom
यह जानना कि हमारा मालिक कौन है, आम इनसान के बस की बात नहीं। हमारे असली मालिक वह पिता-परमेश्वर हैं, जो हर समय हमारा ध्यान रख रहे हैं। चाहे हम सोए हुए हों या जगे हुए हों, वह हमारा ख्याल कर रहे हैं कि हमें कोई तकलीफ न हो, हमारे साथ सब कुछ ठीक-ठाक हो। हमें हर समय खाने की चीजें मिलती रहती हैं। चाहे वह कपड़ा पहनें, न पहनें, पर वह हम सबके लिए कपड़े जरूर तैयार रखते हैं। और हर समय, हर पल, हर जगह जहां भी हम हों, वह हमारे अंग-संग रहते हैं। अगर हम जान लें कि हम प्रभु के ही अंग हैं, उन्हीं का रूप हैं, तो फिर हम अपनी असली मंजिल की ओर बढ़ पाएंगे। महापुरुष हमें यही समझाते हैं कि हम इस माया की दुनिया के जाल में न फंसें।हम लोग यह भूल जाते हैं कि हम कौन हैं। हम सोचते हैं कि हम पिता हैं, माता हैं, बच्चे हैं, भाई-बहन हैं। हम सोचते हैं कि हम अध्यापक हैं, डॉक्टर हैं, इंजीनियर हैं। परन्तु हम सब भूल जाते हैं कि हम प्रभु की संतान हैं, हम खुदा के बंदे हैं, हम एक-दूसरे से अलग नहीं। प्रभु कहीं आसमान में नहीं, हम सबके अंदर बसे हैं। सारे महापुरुष इस धरती पर आकर हमें यही समझाते हैं कि हम यह जानें कि हम कौन हैं। ॐ साईं राम

Sunday, May 2, 2010

श्री साईं सच्चरित्र संदेश

कर्म, योग,ज्ञान और भक्ति ईशवर प्राप्ति के चार मार्ग हैं I हालाँकि यह चार अलग दिशाओ मे जाते है; परन्तु सभी ईशवर प्राप्ति है I

 (CI 15 Adhaya 06 Sai Sachitra Dr R.N.Kakria )

Saturday, May 1, 2010

श्री साईं सच्चरित्र संदेश

यह भागवत गीता के वचन हैं I साईं कहते हैं की इन्हें शाशवत सत्य माना जाना चाहिए I भोजन और वस्त्र का कभी अभाव नहीं होगा इसलिए इनके लिए अधिक चिंतित कभी मत हो I

संतमत: धर्म

धर्म ये नहीं के तुम हिन्दू हो, मुस्लिम हो, सिख हो या ईसाई हो..धर्म परमात्मा ने बनाया है एक, जिससे सब अपने-अपने सदभाव से चलते है सूरज, चाँद, सितारों का भी धर्म है, जो उनका सदभाव बना दिया गया है उसके हिसाब से चलते है अपने सदभाव के अनुरूप ही वो व्यावहार करते है और वो ही धर्म है, तो जब हम अपने अज्ञान को स्वीकारने को तैयार हो जाते है तो हममे धार्मिक होने के लक्ष्ण पैदा हो जाते है और धार्मिक आदमी की ये बहोत बड़ी खासियत है की वो मुह बंद रखता है, वो तर्क-वितर्क नहीं देता फिर, वो तो कहता है अच्छा जी नमस्कार तुम बड़े और मै छोटा ठीक है, फिर झगडा होता नहीं है क्युकी ज्ञानी जिसको की अपने अज्ञान का पता चल गया वो तर्क देता ही नहीं है, एक तर्क तुम दो एक मै दू बात बढती चली जायेंगी इसलिए धार्मिक व्यक्ति को कभी हरा ही नहीं सकते क्युकी वो झगड़ने का मौका ही नहीं देता ये बहोत अच्छी बात है उसकी तो संत बता रहे है की जब भी ध्यान देना अपने अज्ञान पे ध्यान देना की क्या मालूम नहीं है,जब पता चल जायेगा की जो ज्ञान है वो छोटा सा है और अज्ञान बहोत बड़ा है, तो वो हमारे
धार्मिक होने की पहली निशानी है

श्री साई सच्चरित्र



श्री साई सच्चरित्र

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श्री साई सच्चरित्र अध्याय 1

श्री साई सच्चरित्र अध्याय 2


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